नई दिल्ली : शुक्रवार, जून 27, 2025/ ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा आज से शुरू हो रही है। जून-जुलाई में होने वाले इस प्रसिद्ध उत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन देवी सुभद्रा के विग्रह रथों में सवार होकर दर्शन देते हैं और मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाने के लिए तैयार होते हैं। वे गुंडिचा मंदिर में नौ दिन का प्रवास करते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार लगभग 13 लाख भक्त इस वर्ष उत्सव में भाग लेंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालु भव्य रथों पर विराजमान भगवान बलभद्र, भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा के विग्रह और चक्रराज सुदर्शन के दर्शन कर दिव्य अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि इन ईश्वरीय रूपों की मानवीय दिव्य लीला ही इस यात्रा की विशेषता है। राष्ट्रपति ने इस पवित्र अवसर पर भगवान जगन्नाथ से दुनिया भर में शांति, मैत्री और सद्भाव की प्रार्थना की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के शुभ अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में उन्होंने लिखा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पवित्र अवसर पर सभी देशवासियों को मेरी ढेरों शुभकामनाएं। श्रद्धा और भक्ति का यह पावन उत्सव हर किसी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए, यही कामना है।
पुरी के जिला मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ स्वैन ने व्यवस्थाओं के बारे में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यात्रा मार्ग भक्तों से भरा हुआ है। रथ यात्रा से संबंधित सभी अनुष्ठान समय पर आयोजित किए जाएंगे। कल रात से ही पुलिस तैनात कर दी गई है। इस बार एनडीआरएफ को भी तैनात किया गया है।
उन्होंने कहा कि कल हमने अवैध 6-7 ड्रोन हटा दिए। जगन्नाथ मंदिर और गुंडिचा मंदिर के ऊपर ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने और इसके पैमाने को देखते हुए एहतियात के तौर पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की एक टीम को पुरी में तैनात किया गया है।
एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट नवीन राणा ने कहा कि हमारे कर्मियों को सभी स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जिसमें कोई भी चिकित्सा आपातकाल, संरचना का ढहना या कोई अन्य स्थिति शामिल है। हमने यहां जिला प्रशासन के साथ मिलकर चार मॉक ड्रिल आयोजित की थीं।
इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें से अनेक देश के विभिन्न भागों और विदेशों से आए थे, ताकि वे तीनों देवताओं-भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के भव्य रथों को गुंडिचा मंदिर में देख सकें, जहां देवता एक सप्ताह तक रहते हैं और फिर जगन्नाथ मंदिर लौट आते हैं।




