“अब भारत सीमा पार जाकर भी आतंकवाद का सफाया करता है” – उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल

भोपाल : शनिवार, मार्च 22, 2025/ कुशाभाऊ ठाकरे फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक दिवसीय वैचारिक महाकुंभ में विभिन्न विचारकों और विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। इस कार्यक्रम में देशभर से 20 से अधिक प्रमुख वक्ताओं ने पांच सत्रों में अहम विषयों पर विचार प्रस्तुत किए, जिससे यह कार्यक्रम राष्ट्रवाद, सनातन धर्म, और समृद्ध भारत की दिशा में महत्त्वपूर्ण संवाद का केंद्र बन गया। उद्घाटन सत्र से लेकर अन्य सत्रों तक, यह कार्यक्रम राष्ट्रवाद, सनातन धर्म, और समृद्ध भारत की दिशा में महत्त्वपूर्ण संवाद का केंद्र बन गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य स्थिति के रूप में उपस्थित उप मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश राजेंद्र शुक्ल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी, भगवान दास सबनानी विधायक दक्षिण पश्चिम भोपाल, और वरिष्ठ भाजपा नेता ध्रुव नारायण सिंह उपस्थित रहे कार्यक्रम के आयोजक अंशुल तिवारी ने कार्यक्रम की रुपरेखा रखते हुआ शुरुआत की।

राजेंद्र शुक्ल ने कहा कुशाभाउ ठाकरे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन एक ऐसे मिशन में लगा दिया जिसकी कल्पना भी उसे समय से आगे की थी. विदेश के अनसुलझे मामलों को सुलझाने का मिशन की तरह काम करने वाले चुनिंदा लोगों में से थे। वर्तमान भारत में ऐसे जागरूक आयोजन भारत के विकास में बाधा बनने वाली तथाकथित लिबरल मानसिकता को एक्सपोज करने का काम कर रहे हैं।

विश्वास सारंग ने अपने वक्तव्य में कहा भारत का इतिहास तो समृद्ध रहा लेकिन आक्रांताओं और अंग्रेजों ने जो हमारे देश की दशा की और गुलामी के बाद जब स्वतंत्र हुए गुलामी की मानसिकता कहीं ना कहीं देश में रह गई स्वतंत्रता के पश्चात हमने आधारभूत ढांचे पर काम किया सड़के बनाई पुल बनाएं उद्योगों को बल देने पर चर्चा है कि किंतु “व्यक्ति निर्माण” इस पर कोई चर्चा नहीं एक आदर्श व्यक्ति कैसा हो जों देश को विकसित बनाने में अपनी भूमिका का निर्वाह कर सके। उद्घाटन सत्र में ही 4 विभूतियों को कुशाभाऊ ठाकरे राष्ट्ररत्न सम्मान दिए गये जिनमे कारगिल युद्ध में देश की अखंडता के लिए अपना हाथ और दोनों पैर गावाने वाले और ऑपरेशन रक्षक, विजय, पराक्रम में सहभागिता करने वाले रिटायर्ड लांस नायक दीपचंद जी, प्रभु श्री राम लाल अयोध्या के वस्त्रों को डिजाइन करने वाले ड्रेस डिजाइनर मनीष त्रिपाठी जी, जन्म से ही दृष्टिहीन पर एक मिनट में 52 वाद्य यँत्र बजाने का रिकॉर्ड बनाने वाली राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, संगीत शिक्षिका योगिता तांबे, दिव्यांग अधिकार समर्थक, यूफेलिटी प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक टेडेक्स वक्ता एवं तकनीक परामर्शदाता अनंत वैश्य जिन्होने प्रधनमंत्री द्वारा उन्नत कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है जो स्वयं दिव्यांग होने के नाते दिव्यांगों के अधिकारों के समर्थन का नेक कार्य भी करते है।

साध्वी सरस्वती देवी ने “सनातन धर्म: भारत की आत्मा और विश्व पर प्रभाव” विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और धर्म का वैश्विक प्रभाव अब बढ़ता जा रहा है, और यह समय की आवश्यकता है कि हम अपने मूल्यों और धरोहरों को संरक्षित रखें। हमारे सनातन धर्म में विविधता इसलिए है क्योंकि मानव जीवन का स्वाभाव ही कुछ ऐसा है। अगर आप शास्त्रों को पढ़ेंगे तो यह विविधता की समझ स्वयं अनुभव करेंगे कि यह लोक हितार्थ बनाया गया है। लेकिन दुःख तो तब होता है जब लोग इतनी विराटता को छोड़कर पीर फकीर के पास अपनी पीड़ा लिए जाते है, आखिर इन्हें अपने इष्ट से ज्यादा विश्वास उन पर हो जाता है। आज हमारे सामने दो चुनौती है पहला कि अपने टूटे 33 हजार मंदिरों का पुनः स्थापना और सरकार के अधीन मंदिरों की व्यवस्था का स्वतंत्र संचालन करना, इसके लिए आवश्यक है हिन्दुओं का एकत्रीकरण।

वरिष्ठ लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता ने कहा अभी विश्व का सबसे बड़ा जनसमागम सनातन एकता का महाकुम्भ सकुशल सम्पन्न हुआ। यहाँ मैं तो पहले एक पर्यटक के रूप में एक सप्ताह के लिए गया किन्तु एक महीने बाद श्रद्धालु बनकर लौटा और निश्चित ही वहाँ की अनुभूति से लगा कि हम इतनी वैज्ञानिकता का बोध होने के बाद भी जब अपने धर्मस्थलों पर जाते है तो यह दृष्टिकोण स्पष्ट होता है, भारतीय को पाप से डर लगता है यही भारत की सनातन आत्मा है।प्रसिद्ध फैशन डिजायनर एवं श्री रामलला के वस्त्र निर्माता मनीष त्रिपाठी ने कहा कि जब मैंने पढ़ाई पूर्ण की तो देश के कई लोकप्रिय एवं अतिविशिष्ट लोगों के वस्त्र डिजायन किया और भारतीय क्रिकेट टीम सहित इस तरह के कई प्रकार कम्पनियों के वस्त्र डिजाइन करते हुए काम किया किन्तु जो अनुभूति एवं सौभाग्य का सहज आभास प्रभु श्री राम लला के हेतु वस्त्र तैयार करने में हुई वह जीवन का सबसे अविस्मरणीय एवं अतुलनीय क्षण था। पहले सत्र की अध्यक्षता करते हुए स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि इस वैचारिक मंथन से निकले हुए अमित को पूरे भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व को ग्रहण करना चाहिए।

दूसरे सत्र में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पंडित नेहरू के समय से चली आ रही थी और अब इसे फिर से लागू करने की आवश्यकता है। उपाध्याय ने बताया कि दुनिया के 48 देशों में यह व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है, जिससे चुनावों में समय और संसाधनों की बचत होती है। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जो पार्टी आज इस व्यवस्था का विरोध कर रही है, वही कभी इस व्यवस्था की समर्थक थी। इस सत्र की अध्यक्षता पूर्व सैनिक नायक दीप चंद ने की।

तीसरे सत्र में प्रियंक कानूनगो ने “सोरोस की कथा और भारत के खिलाफ गहरी साजिश” पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डीप स्टेट और उसके एजेंट्स के भारत में बढ़ते प्रभाव पर चर्चा की। प्रियंक ने युवाओं से अपील की कि वे खबरों के पीछे की सच्चाई को समझें और राजनीतिक षड्यंत्रों से अवगत रहें। उन्होंने बताया कि डीप स्टेट एक गुप्त नेटवर्क है जो राज्य के राजनीतिक नेतृत्व से स्वतंत्र रूप से संचालित होता है, और इसका उद्देश्य अपनी एजेंडों को लागू करना होता है।

उन्होंने आगे कहा कि – डीप स्टेट के बारे मे संबोधित करते हुआ कहा की आज कल की युवा पीढ़ी को ख़बर के पीछे की ख़बर पढ़ने की जरूरत हैं उन्होंने कहा की डीप स्टेट एक प्रकार की सरकार है जो सत्ता के संभावित, अनधिकृत गुप्त नेटवर्क से बनी होती है जो अपने स्वयं के एजेंडे और लक्ष्यों की खोज में राज्य के राजनीतिक नेतृत्व से स्वतंत्र रूप से संचालित होती हैं और इस शब्द की उत्पत्ति तुर्की में हुई थी, लेकिन विभिन्न देशों ने इस अवधारणा की अपनी-अपनी व्याख्याएँ विकसित की हैं। कुछ संदर्भों में, “डीप स्टेट” का उपयोग छायादार षड्यंत्रों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है ,आगे संबोधित करते हुए कहा की जो भी युवा है उनको आखें खोलने की जरूरत है और आस – पास की को समझने की आवश्यकता है। इसकी अध्यक्षता दिव्यांगों के लिए अप निर्माण करने वाले अनंत वैश्य जी ने की।

चौथे सत्र में अभिनेत्री भाषा सुम्बली और फिल्म निर्माता देवेंद्र मालवीय ने भारतीय सिनेमा में राष्ट्रवादी विषयों की महत्वपूर्णता पर चर्चा की। भाषा सुम्बली ने “द कश्मीर फाइल्स” फिल्म के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों की पीड़ा और सच्चाई को सामने लाना उनके लिए एक भावनात्मक यात्रा थी। देवेंद्र मालवीय ने सत्य पर आधारित फिल्मों की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि ऐसे फिल्में राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिक सत्य को उजागर करती हैं, जबकि प्रोपेगेंडा वह सिनेमा होता है जो इन महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज करता है।

पाँचवे सत्र में नीरज अत्री और नाजिया इलाही खान ने “गंगा-जमुनाई तहजीब” पर अपने विचार व्यक्त किए और उसको एक्सपोज किया। नीरज अत्री ने गंगा जमुना तहजीब का अर्थ समझाते हुए कहा ” मस्जिदों में मौलवियों का एक छात्र राज चलता है , गिरजाघर में पादरियों का , और हमारे मंदिर में कमेटियों का”।

वे बताते हैं कि मस्जिदों में मौलवी अपने अनुयायियों पर नियंत्रण रखते हैं, गिरजाघरों में पादरी अपनी प्रभुता बनाए रखते हैं, जबकि हिंदू मंदिरों में धार्मिक व्यवस्थाएँ समिति के हाथों में चली जाती हैं। इसका अर्थ यह है कि जहाँ अन्य धर्मों में धार्मिक नेतृत्व का एक केंद्रीकृत स्वरूप है, वहीं हिंदू मंदिरों में प्रशासनिक और धार्मिक नियंत्रण विभिन्न समितियों के अधीन होता है। जिससे उसकी एकता और प्रभावशीलता प्रभावित होती है। और यही हिंदुओं को भ्रमित करती है उनकी संख्या को कम करती है

नाज़िया इलाही खान ने , मदरसों की शिक्षा को एक्सपोज करते हुए कहा ” मदरसों में हिंदुओं को खत्म करने की बात कही जाती है , काफिरों को तड़पाने की तालीम दी जाती है” , वो आगे कहती है मदरसों में इस्लामी शिक्षा दी जाती है, जिसमें कुरान, हदीस और शरीयत पढ़ाए जाते हैं। जिसमें कुरान की 26 आयतें काफिरों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती हैं और उन्हें जीने योग्य नहीं मानतीं। विशेष रूप से, सूरा तौबा को उद्धृत करते हुए कहा जाता है कि इसमें काफिरों को इस्लाम स्वीकार करने या मारे जाने का आदेश दिया गया है।

इस कार्यक्रम में पांच प्रमुख सत्रों ने भारतीय राजनीति, धर्म, समाज और सिनेमा के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कुशाभाऊ ठाकरे फाउंडेशन का यह आयोजन देश को सही दिशा में ले जाने और राष्ट्रीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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