महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार अपनी मंशा स्पष्ट करे: मुकेश नायक

भोपाल : शुक्रवार, अप्रैल 17, 2026/ मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय, भोपाल स्थित मीडिया कक्ष में आज प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पैनलिस्ट अभय दुबे द्वारा महत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की गई।

प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए मुकेश नायक ने महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए स्पष्ट जवाब की मांग की। उन्होंने कहा कि सांसद एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

नायक ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित संविधान संशोधन में स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि महिला आरक्षण लागू करने से पूर्व जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि केंद्र सरकार अपने ही प्रावधानों से पीछे हटती नजर आ रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, तब उसी विषय से संबंधित संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा और मतदान का क्या औचित्य है। यह पूरी प्रक्रिया केवल राजनीतिक उद्देश्य से संचालित प्रतीत होती है, जिससे न केवल भ्रम की स्थिति बन रही है, बल्कि सरकार की नीयत पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक वास्तव में महिला आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, जिस पर महिला आरक्षण का आवरण डाला जा रहा है। उन्होंने प्रश्न किया कि पिछले 30 महीनों में ऐसा क्या बदल गया कि 2023 के बाद की जनगणना की बात करने वाली सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार की ओर लौटती नजर आ रही है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पैनलिस्ट अभय दुबे ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किसी कानून की अधिसूचना जारी किए बिना उसका संशोधन किस प्रकार संभव है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रस्तुत करते समय प्रधानमंत्री द्वारा 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कही गई थी, जिसका सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था, साथ ही यह शर्त भी जोड़ी गई थी कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन और उसके बाद ही आरक्षण लागू किया जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में बिना विधिक स्पष्टता के एकतरफा निर्णय लेने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना से बचने का प्रयास किया जा रहा है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

 

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