नई दिल्ली : शनिवार, अप्रैल 11, 2026/ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज शनिवार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा, विकसित भारत की दिशा में भारत की यात्रा का एक अपरिहार्य स्तंभ है, प्रत्येक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है, न कि केवल रक्षा बलों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां सैनिक रक्षा की पहली पंक्ति हैं, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती लोगों के बीच एकता, अनुशासन और जागरूकता से भी समान रूप से तय होती है।
इस बात पर जोर देते हुए कि उभरती चुनौतियों और मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करते हुए कोई भी व्यक्ति निष्क्रिय नहीं रह सकता है, रक्षा मंत्री ने लोगों से जिम्मेदारी से और प्रतिबद्धता की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा “राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। नागरिकों को कानून का पालन करके, गलत सूचनाओं को नकार कर और राष्ट्र के हितों को अपने व्यक्तिगत हित से ऊपर रखकर राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान देना चाहिए। एक राष्ट्र के रूप में, हम विभिन्न शत्रुतापूर्ण तत्वों से घिरे हुए हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे पास उपलब्ध प्रत्येक संसाधन का बेहतर उपयोग हो।”
आज के तेजी से बदलते परिदृश्य में ‘सूचना’ को एक शक्तिशाली साधन बताते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा कि गलत सूचना और अफवाहों में समाज के भीतर अस्थिरता पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसलिए, यह सुनिश्चित करने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है कि जनता तक सही और विश्वसनीय सूचना पहुंचे। उन्होंने कहा “मीडिया केवल समाचार प्रसारित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली संस्था है जो जनमत को आकार देती है। मीडिया को यह समझना होगा कि अगर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। राष्ट्र-निर्माण में एक प्रमुख भागीदार के रूप में मीडिया की यह जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके द्वारा प्रस्तुत सामग्री राष्ट्रीय हित में हो और उससे अनावश्यक भय या भ्रम न फैले।”
यह दोहराते हुए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कोई समझौता नहीं करती है, रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत@2047 के विज़न के अनुरूप, रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ कल्याणकारी उपायों को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रक्षा बल भारत की धरती पर ही निर्मित अत्याधुनिक हथियारों और प्लेटफॉर्म से लैस हों।
सरकार द्वारा किए जा रहे आत्मनिर्भरता के प्रयासों की सफलता के बारे में बताते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया, और 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया—जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की भारी वृद्धि है। उन्होंने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद जताई। उन्होंने यह भी कहा, “हमारे प्रयास एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव रख रहे हैं। जिस गति से हम आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए भारत जल्द ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा और दुनिया के अग्रणी देशों में अपना स्थान बना लेगा।”
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ़ भौतिक बुनियादी ढांचा खड़ा करना नहीं है, बल्कि यह आपसी जिम्मेदारी पर आधारित समाज को बढ़ावा देने के बारे में भी है, जहां कोई भी पीछे न छूटे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी, हमें सैनिकों की उस टीमवर्क की भावना को अपनाना चाहिए, जिसे वे युद्ध के मैदान की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी आपसी तालमेल (यूनिट कोहेजन) के जरिए प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस भावना को विकसित भारत के लक्ष्य को पाने की दिशा में देश की आगे की यात्रा का मार्गदर्शन करना चाहिए।
इस कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, राजनाथ सिंह ने वीरता पुरस्कार से सम्मानित युद्ध नायकों को सम्मानित किया। इनमें सूबेदार मेजर (सेवानिवृत्त) (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव; सूबेदार और मानद कैप्टन करम सिंह के परिजनों, कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडे और ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान; और शहीद हुए नायकों की ‘वीर नारियां’ शामिल थीं। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र सेवा में उनके शौर्य और बलिदान को नमन किया।
रक्षा मंत्री ने मेजर सोमनाथ शर्मा, नायक जदुनाथ सिंह, कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद, कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडे जैसे वीर योद्धाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनकी वीरता की गाथाएं लोगों को, विशेष रूप से युवाओं को, निरंतर प्रेरित रहेंगी और उनमें साहस, देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा तथा बलिदान की भावना को भी विकसित करती रहेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वीरता पुरस्कार विजेताओं की कहानियां युवाओं के जीवन को आकार देने में एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगी।
राजनाथ सिंह ने वीर सैनिकों के परिवारों को मातृभूमि की सेवा करने वालों का मनोबल ऊंचा रखने वाला अदृश्य शक्ति स्तंभ बताया तथा भारत की संप्रभुता की रक्षा और सैनिकों के सम्मान को बनाए रखने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय सुरक्षा में इन परिवारों के अमूल्य योगदान का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “जब भी मैं शहीद सैनिकों के परिवारों से मिलता हूं, तो मुझे उनके दुःख का एहसास होता है, लेकिन उनके भीतर गर्व की भावना भी होती है, जिसमें किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं होती। ऐसी दृढ़ता उस संस्कृति से उत्पन्न होती है, जहां बलिदान को सर्वोच्च मूल्य माना जाता है।”
इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए।




