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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे में देरी से बड़ी ताकत बनते जा रहे हैं राहुल गाँधी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नयी दिल्ली की सड़कों पर पिछले दो हफ्तों से लगभग रोज ही प्रदर्शन हो रहे है और अब जंतर मंतर को धरना प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने के सरकार के फैसले ने प्रदर्शनकारी संगठनों और विपक्षी दलों को और आक्रोशित कर दिया है। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर ही हुए छात्र आंदोलन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए विवश कर दिया था। सरकार इस बार वैसा कोई जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं है इसलिए उसने बहुत सोच समझ कर जंतर मंतर को प्रतिबंधित करने का जो फैसला किया है उसके पीछे उसकी एकमात्र मंशा यही है कि अब जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पटकथा लिखने में प्रदर्शनकारी संगठन और विपक्षी राजनीतिक दल सफल न हो सकें। इसीलिए जो विपक्षी दल और संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर जोर देने के लिए एक पखवाड़े से प्रदर्शन कर रहे हैं वे सरकार पर यह दबाव बनाने जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन और धरने का हक उन्हें पहले की तरह मिलता रहे। तीन दिन पहले काकरोच जनता पार्टी के सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे और उनके कुछ साथियों ने जंतर मंतर के गेट से अंदर कूदकर जो नारेबाजी की उसके पीछे उनकी मंशा भी सरकार पर दबाव बनाने की ही थी। आशुतोष रांका ने हिरासत में लिए जाने के बाद भी जंतर मंतर को प्रतिबंध मुक्त करने की मांग दोहराते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा जंतर मंतर से ही होगा।

बहरहाल आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन तिहाड़ जेल में गुजारना है और इधर अभिजीत दीपके ने अपने दो साथियों को जेल भेजे जाने के विरोध में 16 अक्टूबर को कनाट प्लेस में प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। उन्होंने इसे ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान कहते हुए सभी से इसमें शामिल होने की अपील की है। लेकिन इंडिया ब्लॉक में शामिल विपक्षी दलों के नेताओं ने इस प्रदर्शन में शामिल होने का कोई संकेत नहीं दिया है यद्यपि काकरोच जनता पार्टी के दो नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के फैसले की अनेक विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं के साथ ही लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भी आलोचना की है। राहुल गाँधी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ‘जन्तर मन्तर पर शांति पूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा लहराना अपराध नहीं है।इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है।स्टुडेंट्स, युवा,पत्रकार, इंडिया ब्लॉक। अलग अलग बैनर एक मकसद। सब विरोध एक ही हैं। जंतर मंतर भारत के लोगों का है हम इसे लेकर रहेंगे।’ उधर अभिजीत दीपके भी जो कहते हैं उसका भी मतलब यही है।सभी प्रदर्शन एक ही मुद्दे पर हो रहे हैं। हम सबका मकसद एक ही है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ना। लेकिन सवाल यह उठता है कि गत जून माह से लेकर अभी तक इंडिया ब्लॉक और काकरोच जनता‌ पार्टी की लड़ाई का मकसद एक होते हुए भी क्यों दोनों ने एक दूसरे से निश्चित दूरी बनाकर रखी है।

इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन में काकरोच जनता पार्टी शामिल नहीं होती और जब काकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन करती है तो इंडिया ब्लॉक के सदस्य दल उसमें अपनी मौजूदगी दिखाने से परहेज करती है। जून से लेकर अभी तक यह सिलसिला जारी है। विगत 2 अक्टूबर को काकरोच जनता पार्टी द्वारा मुम्बई में किए गए प्रदर्शन में इंडिया ब्लॉक ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई तो 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक की रैली से काकरोच जनता पार्टी ने दूरी बना कर रखी। 10 अक्टूबर को नई दिल्ली में काकरोच जनता पार्टी द्वारा किए गए प्रदर्शन के वक्त राहुल गाँधी चेन्नई में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। गत जुलाई में भी काकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित धरना प्रदर्शन में राहुल गाँधी शामिल नहीं हुए थे और प्रधानमंत्री आवास पर राहुल गाँधी द्वारा दिए गए धरना में काकरोच जनता पार्टी ने भागीदारी नहीं की। यद्यपि इंडिया ब्लॉक और काकरोच जनता पार्टी प्रायः एक दूसरे के विरुद्ध बयान देने से बचते हैं लेकिन एक दूसरे के साथ मंच साझा करने में दोनों की ओर से अभी तक कोई रुचि प्रदर्शित नहीं की गई। बताया जाता है कि राहुल गाँधी ने अपने आवास पर 13 अक्टूबर को जो हाई टी का कार्यक्रम रखा था उसमें शामिल होने के लिए अभिजीत दीपके को निमंत्रण भेजा गया था परंतु उन्होंने उसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया। वैसे भी वे उस दिन वे महाराष्ट्र में थे। हाँ, अगर वह चाहते तो अपनी पार्टी के किसी नेता से राहुल गाँधी द्वारा आयोजित हाई टी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कह सकते थे। दरअसल राहुल गाँधी की मंशा यह है कि अभिजीत दीपके इंडिया ब्लॉक के बैनर तले आकर अपनी लड़ाई लडें परंतु अभिजीत दीपके किसी राजनीतिक दल के साथ खड़े नहीं दिखना चाहते। उन्होंने पहले ही कह दिया है कि काकरोच जनता पार्टी प्रेशर ग्रुप के रूप में अपनी पहचान बनाए रखेगी। सवाल यह उठता है कि जब इंडिया ब्लॉक और काकरोच जनता पार्टी की लड़ाई का मकसद एक ही है तो फिर उस लड़ाई को मिलकर क्यों नहीं लडा जा सकता। इसका उत्तर यही है कि दोनों यह चाहते हैं कि अगर आगे चलकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा देने के लिए विवश होते हैं तो उसके श्रेय में कोई विभाजन न हो सके। फिलहाल तो दोनों एक साथ मिलकर इस लड़ाई को आगे बढाने के प्रति गंभीर दिखाई नहीं देते यद्यपि उन्हें इस हकीकत का एहसास तो हो चुका है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए उन्हें जो लड़ाई लड़नी पडे़गी उसकी कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती। लेकिन इसमें दो राय नहीं ह़ो सकती कि आज की तारीख में राहुल गाँधी का कद अभिजीत दीपके से बड़ा दिखाई दे रहा है।

कृष्णमोहन झा (लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)

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