छत्तीसगढ़

महिला के हार्ट की 60% क्षमता प्रभावित, डॉक्टरों ने सफल बाईपास सर्जरी कर बचाई जान

रायपुर| छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में एक बड़ी चिकित्सीय सफलता हासिल हुई है। यहाँ बिहार के मधुबनी जिले से आईं 48 वर्षीय एक महिला मरीज की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की गई है। महिला के हृदय की तीनों प्रमुख धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था, जिसे चिकित्सीय भाषा में 'ट्रिपल वेसल डिजीज' (TVD) कहा जाता है, और इसके साथ ही उनके हृदय की पंपिंग क्षमता भी गिरकर करीब 40 प्रतिशत रह गई थी।

गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीक और बीटिंग हार्ट सर्जरी

विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी विशेषज्ञ टीम ने मरीज की 'बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी' को बेहद सफलता के साथ अंजाम दिया। इस जटिल प्रक्रिया में बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का उपयोग किया गया, जिसे चिकित्सा जगत में लंबे समय तक अत्यधिक प्रभावी और टिकाऊ माना जाता है।

मरीज की यह सर्जरी 'मिडलाइन स्टर्नोटोमी' (Midline Sternotomy) तकनीक के माध्यम से की गई। इस स्थापित और विश्वसनीय विधि में सीने की मध्य हड्डी (स्टर्नम) को सुरक्षित रूप से खोलकर हृदय तक पहुँच बनाई जाती है, जिसे कार्डियक सर्जरी में 'गोल्ड स्टैंडर्ड तकनीक' माना जाता है। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी बेहद तेज और संतोषजनक रही; ऑपरेशन वाले दिन ही होश में आने पर उन्होंने हल्का नाश्ता किया और अगले ही दिन से अपने पैरों पर चलना-फिरना शुरू कर दिया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।

मधुबनी से रायपुर तक का सफर और आयुष्मान योजना का लाभ

परिजनों ने साझा किया कि करीब डेढ़ महीने पहले जब महिला को सीने में तेज दर्द हुआ, तो वे उन्हें मधुबनी के एक स्थानीय अस्पताल ले गए थे, जहाँ कार्डियक स्पेशलिस्ट की सुविधा न होने के कारण उन्हें केवल गैस और एसिडिटी की दवाएं देकर वापस भेज दिया गया था। कुछ समय बाद जब दर्द दोबारा उभरा, तो परिजन उन्हें दरभंगा के एक बड़े अस्पताल ले गए, जहाँ एंजियोग्राफी के बाद हृदय की तीनों नसों में ब्लॉकेज का पता चला और बाईपास सर्जरी की सलाह दी गई।

शुरुआत में परिवार पटना में सर्जरी कराने का मन बना रहा था, तभी रायपुर में रहने वाले एक रिश्तेदार ने उन्हें अंबेडकर अस्पताल के इस उन्नत विभाग के बारे में जानकारी दी। परिजन तुरंत एंजियोग्राफी की सीडी लेकर रायपुर पहुँचे और डॉ. कृष्णकांत साहू से परामर्श लिया। चूँकि मरीज बिहार की निवासी थीं, इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या बिहार के आयुष्मान कार्ड का लाभ छत्तीसगढ़ में मिल पाएगा या नहीं। अंबेडकर अस्पताल स्थित आयुष्मान योजना कार्यालय से पुष्टि होने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इस कार्ड के जरिए यहाँ भी मुफ्त इलाज संभव है, जिसके बाद उन्हें तुरंत भर्ती कर उपचार शुरू किया गया।

चुनौतीपूर्ण था 500 mg/dL से अधिक ब्लड शुगर को नियंत्रित करना

इस सफल ऑपरेशन के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती मरीज का अत्यधिक अनियंत्रित ब्लड शुगर था। जब उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया, उस वक्त उनका ब्लड शुगर स्तर 500 mg/dL से भी अधिक था। इस खतरनाक स्थिति में सीधे सर्जरी करना मरीज की जान के लिए भारी जोखिम भरा हो सकता था। इसलिए, सर्जिकल टीम ने सबसे पहले दवाइयों और उचित चिकित्सा के माध्यम से उनके ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर नियंत्रित किया और जब उनकी शारीरिक स्थिति पूरी तरह सुरक्षित पाई गई, तब जाकर बाईपास सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

बढ़ता जोखिम और विशेषज्ञों की सलाह

ऑपरेशन करने वाले विशेषज्ञ डॉ. कृष्णकांत साहू ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि आजकल कम उम्र की महिलाओं में भी हृदय रोगों (CAD) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। आमतौर पर यह माना जाता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह जोखिम कम होता है और यह अधिक उम्र में सामने आता है, लेकिन अनियंत्रित मधुमेह, मोटापा, तंबाकू का सेवन, बढ़ता वजन, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली अब युवा महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रहे हैं। उन्होंने सलाह दी है कि सीने में दर्द, सांस फूलने या अत्यधिक थकान जैसे शुरुआती लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अंबेडकर अस्पताल की बढ़ती साख और चिकित्सा टीम का योगदान

पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने इस बड़ी सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी है। उनका कहना है कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि अब राज्य के अलावा बिहार और अन्य पड़ोसी राज्यों के मरीज भी जटिल हृदय व ओपन हार्ट सर्जरी के लिए भरोसे के साथ अंबेडकर अस्पताल का रुख कर रहे हैं।

इस कठिन और सफल ऑपरेशन को पूरा करने में प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू के साथ-साथ कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, पीजी डॉ. लिपी गौतम, परफ्यूजिस्ट अंकिता व डिगेश्वर, नर्सिंग स्टाफ (राजेन्द्र, नूतन देवांगन, नरेन्द्र, चोवा, दुष्यंत, मुनेश), एनेस्थेसिया टेक्नीशियन टीम (भूपेन्द्र, हरीश, निराकार, सरिता, खेमसिंह, रोजलीन) तथा आईसीयू के सभी नर्सिंग स्टाफ का अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय योगदान रहा है।

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