रोमन कैथेलिक चर्च के धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का 88 वर्ष में निधन

नई दिल्ली : सोमवार, अप्रैल 21, 2025/ रोमन कैथेलिक चर्च के धर्मगुरू पोप फ्रांसिस का आज वेटिकन सिटी में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। पिछले कुछ हफ्तों से वे बीमार चल रहे थे। पोप फ्रांसिस पहले लातिनी अमरीकी पोप थे और वे सर्वाधिक उम्र में पोप बनने वाले व्‍यक्ति भी थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार को पोप फ्रांसिस के निधन पर गहरा शोक जताया और कहा कि भारत के लोगों के लिए उनका स्नेह हमेशा याद रखा जाएगा। प्रधानमंत्री ने उन्हें करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस का प्रतीक बताया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म ‘एक्स’ पर लिखा,”पोप फ्रांसिस के निधन से अत्यंत दुखी हूं। यह समय शोक और स्मृति का है। पूरे कैथोलिक समुदाय को मेरी संवेदनाएं। उन्होंने गरीबों और पीड़ितों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया।” पीएम ने कहा कि वह पोप से हुई अपनी मुलाकातों को स्नेहपूर्वक याद करते हैं और उनके समावेशी विकास की सोच से बहुत प्रेरित हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोप फ्रांसिस के बीच पहली मुलाकात अक्टूबर 2021 में वेटिकन सिटी में हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने कोविड-19, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की थी। दूसरी मुलाकात जून 2024 में इटली के अपूलिया शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पोप फ्रांसिस को भारत आने का निमंत्रण भी दिया था। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी से गले मिलते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गई थीं।

वेटिकन के अनुसार, पोप फ्रांसिस का निधन उनके निजी निवास पर हुआ, यह जानकारी कार्डिनल केविन जोसेफ फैरेल ने दी, जो ‘कैमरलेन्गो ऑफ द होली रोमन चर्च’ हैं। पोप की मृत्यु के बाद अब ‘पैपल इंटररेग्नम’ की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसके अंतर्गत नए पोप का चुनाव किया जाएगा। शोक की परंपरा के तहत नौ दिनों तक ‘नोवेंडियालेस’ नामक प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाएंगी और पोप का पार्थिव शरीर सेंट पीटर्स बेसिलिका में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। पोप की अंत्येष्टि चौथे से छठे दिन के बीच की जाएगी और उसके बाद सभी 80 वर्ष से कम उम्र के कार्डिनल एकत्र होकर ‘कोन्क्लेव’ में नए पोप के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

वहीं केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री (अल्पसंख्यक कार्य) जॉर्ज कुरियन ने भी पोप फ्रांसिस के निधन पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि यह वैश्विक समुदाय के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि पोप का जीवन सेवा, करुणा और विश्वास से परिपूर्ण था, जिसने लाखों लोगों को छुआ। जॉर्ज कुरियन पिछले वर्ष वेटिकन गए थे, जब केरल के मूल निवासी मोनसिग्नोर जॉर्ज जैकब कूवाकाड को पोप फ्रांसिस द्वारा कार्डिनल के रूप में पदोन्नत किया गया था।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें अत्यंत विनम्र व्यक्ति के रूप में याद किया। उन्होंने वंचितों के प्रति उनके प्रेम का उल्‍लेख किया और उम्मीद जताई कि पोप की विरासत दुनिया को प्रेरित करती रहेगी। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्‍लास ने भी पोप फ्रांसिस के निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने दुनिया के सभी कैथोलिकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, कैथोलिक चर्च और दुनिया ने कमज़ोर वर्गों की आवाज उठाने वाला, मिलनसार और उत्‍साही व्यक्ति खो दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सभी के लिए न्यायपूर्ण दुनिया को बढ़ावा देने के पोप फ्रांसिस के अथक प्रयास हमेशा याद किए जाते रहेंगे। इटली के प्रधानमंत्री मेलोनी ने भी गहरा दुख व्यक्त किया और पोप फ्रांसिस को एक महान व्यक्ति और पादरी बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि पोप फ्रांसिस चाहते थे कि चर्च सबसे गरीब लोगों के लिए खुशी और उम्मीद लेकर आए।

पोप फ्रांसिस, जिनका असली नाम जॉर्ज मारियो बेर्गोलियो था, वे अर्जेंटीना से थे और 2013 में कैथोलिक चर्च के 266वें पोप बने थे। वे पहले लैटिन अमेरिकी और जेसुइट समुदाय से आने वाले पहले पोप थे। उन्होंने गरीबों की सेवा, पर्यावरण संरक्षण, शांति स्थापना और धर्मों के बीच संवाद को हमेशा प्राथमिकता दी। निधन से ठीक एक दिन पहले, 20 अप्रैल 2025 को उन्होंने सेंट पीटर्स बेसिलिका की बालकनी से हजारों लोगों को संबोधित करते हुए ईस्टर उपदेश भी दिया था। यह उनका अंतिम सार्वजनिक संदेश था। उनकी मृत्यु के बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर है और लाखों श्रद्धालु वेटिकन पहुंचने लगे हैं।

 

 

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