महाकुम्‍भ मेला विश्‍व के सबसे बडे़ आध्‍यात्मिक समारोह के रूप में मनाया जाता है

नई दिल्ली : बुधवार, जनवरी 1, 2025/ महाकुम्‍भ मेला विश्‍व के सबसे बडे़ आध्‍यात्मिक समारोह के रूप में मनाया जाता है। यह मेला आस्‍था, संस्‍कृति और प्राचीन परंपरा का एक असाधारण उत्‍सव है। हिन्‍दू पौराणिक कथाओं के अनुसार यह पवित्र उत्‍सव 12 वर्षो के अंतराल पर मनाया जाता है। यह मेला भारत के चार पवित्र शहरों हरिद्वार, उज्‍जैन, नासिक और प्रयागराज में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। इनमें से प्रत्‍येक शहर भारत की पवित्र नदियों के किनारे स्थित है। वर्ष 2025 में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज एक बार फिर इस उत्‍कृष्‍ट समारोह का केन्‍द्र बनने जा रहा है। यह मेला भक्ति, एकता और भारत की जीवंत आध्‍यात्मिक विरासत के प्रगाढ़ प्रदर्शन का साक्षी बनेगा।

प्रयागराज का महाकुंभ मेला 2025 भक्ति और नवाचार का एक अद्वितीय मेल को दर्शाएगा। इस मेले में अनुमानित 45 करोड़ श्रद्धालु आ सकते हैं। श्रद्धालुओं को सुरक्षित और अच्‍छी अनुभूति प्रदान करने के लिए व्‍यापक तैयारियां की जा रही हैं। इस वर्ष के कुंभ को उत्‍कृष्‍ट बनाने के लिए विश्‍व स्‍तरीय प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। डिजीटल भूमि आवंटन, 360 डिग्री के वर्चुअल रियलिटी स्‍टॉल और गूगल पर भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित नक्‍शे श्रद्धालुओं की भागीदारी को निर्बाध बना रहे हैं। इस मेले में प्रयाग महात्‍मयम और समुद्र मंथन की पौराणिक कथाएं सुनाने वाले दो हजार ड्रोन के साथ एक शानदार ड्रोन शो भी आयोजित किया जाएगा। इससे शाम को आकाश में एक विजुअल चमत्‍कार का अनुभव श्रद्धालुओं को होगा।

24 घंटे निगरानी करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित कैमरों, रिमोट नियंत्रित जीवन रक्षकों और अंडरवाटर ड्रोन जैसी उन्‍नत प्रणालियों के साथ सुरक्षा को वरीयता दी जा रही है। 56 साइबर रक्षकों के साथ एक समर्पित साइबर पुलिस स्‍टेशन ऑनलाइन खतरों से निपटने के लिए स्‍थापित किये गए हैं। इससे विश्‍वभर के श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और सोशल मीडिया अपडेट के माध्यम से लापता व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए उच्च तकनीक से सुसज्जित खोया-पाया केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस बीच टैंट सिटी में ठहरने के लिए आई आर सी टी सी जैसे मंचों के जरिये ऑनलाइन बुकिंग 10 जनवरी से शुरू होगी।

इन अखाड़ों की अपनी पृथक परम्पराएं एवं विशेषताएं हैं। इनके अपने अलग-अलग रीति-रिवाज एवं संकल्प हैं। दस संघ अथवा दशनामी सन्यासी अखाड़े कर्म प्रधान इस जगत का त्याग कर गृहहीन, भ्रमणशील, धार्मिक, भिक्षुक-जीवन की स्वीकृति का अनुष्ठान, संन्यास का प्रचलन पुरातन मानव के अन्तरतम में ईश्वरवादी भावना के अरुणोदय काल से ही है। प्राचीनतम आर्ष ग्रन्थवेद में भी जटाधारी गेरुए चीर धारण करने वालों की उपमा आकाश स्थित सूर्य से दी जाती थी।

पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा-सम्वत् 603 ज्येष्ठ कृष्णपक्ष, नवमी, शुक्रवार को इसकी स्थापना हरद्वार भारती ने किया था। इस अखाड़े के इष्टदेव भैरव हैं।पंचायती अटल अखाड़ा-सम्वत् 603 मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष चतुर्थी, रविवार को इसकी स्थापना हुई थी। गजानन (गणेशजी) इसके इष्टदेव हैं। पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी-सम्वत् 805 मार्गशीर्ष दशमी, गुरुवार को शुभकरनजी ने इस अखाड़े की स्थापना की थी। कपिलमुनिजी इस अखाड़े के इष्टदेव हैं। तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती-सम्वत् 912, (सन् 856) ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष, चतुर्थी रविवार को इस अखाड़े की स्थापना हुई थी। सूर्यनारायण इस अखाड़े के इष्टदेव हैं। पंचायती अखाड़ा निरंजनी- सम्वत् १८० कार्तिक कृष्ण पक्ष, षष्ठी, सोमवार को इस अखाड़े की स्थापना कच्छ देश में माण्डवी नामक स्थान पर हुई। स्वामी कार्तिकयजी इस अखाड़े के इष्टदेव हैं।

पंचदशनाम जूना अखाड़ा- (प्रारंभिक नाम भैरव) सम्वत् 1202 कार्तिक शुक्ल पक्ष दशमी, मंगलवार को उत्तराखण्ड में कर्णप्रयाग में इस अखाड़े का निर्माण हुआ। गुरु दत्तात्रेयजी इस अखाड़े के इष्टदेव हैं। पंच अग्नि अखाड़े की स्थापना विक्रम संवत् 1992 अषाढ़ शुक्ला एकादशी सन् 1136 में हुई। इनकी इष्ट देव गायत्री हैं और इनका प्रधान केंद्र काशी है। बड़ा उदासीन अखाड़ा- इस अखाड़े की स्थापना 1788 ई. को आश्विन कृष्ण 9 को प्रीतमदास ने किया। इस अखाड़े के इष्टदेव चन्द्र भगवान हैं।

नया उदासीन अखाड़ा- सन् 1902 में प्रयागराज में उदासीन महात्मा सूरदास जी की प्रेरणा से हुआ। इस अखाड़े के इष्टदेव चन्द्र भगवान हैं। पंचायती निर्मल अखाड़ा- सन् 1816 में रमता निर्मल अखाड़े की रुपरेखा बनायी गई तथा सन् 1912 के हरिद्वार कुंभ में श्रीमहंत बाबा महताब सिंह की अध्यक्षता में निर्मल पंचायती अखाड़े की स्थापना हुई। इस अखाड़े का मुख्य केन्द्र कीडगंज, प्रयागराज है, इनके इष्टदेव ‘श्री गुरूनानक ग्रंथसाहिब’ हैं।

आपको बता दें कि अखाड़े दो भागों में विभाजित हैं- शैव तथा वैष्णव। उपर्युक्त सात अखाड़े शैवों के हैं। इनमें अटल अखाड़ा आठ भागों में विभाजित हैं, जिन्हें ‘दावा’ कहते हैं। इनमें 52 ‘मढ़ी’ हैं। इसी तरह सभी अखाड़े 52 मढ़ियों में विभाजित हैं। वैष्णव अखाड़ों का जन्म शैवों के मत भिन्नता के विरुद्ध हुआ था। रामानन्दी सम्प्रदाय के बालानन्दजी ने तीन अनी दिगम्बर, निर्मोही एवं निर्वाणी अखाड़े का निर्माण किया। इनके इष्टदेव श्रीराम और श्रीश्याम(श्रीकृष्ण) हैं।

महाकुंभ में प्रदेश सरकार ने अखाड़ों, संस्थाओं और कल्पवासियों के लिए बड़े पैमाने पर अन्न भंडार की व्यवस्था की है। ऐसा पहली बार है, जब महाकुंभ में इतने बड़े पैमाने पर अखाड़ों, संस्थाओं और कल्पवासियों को नाम मात्र की कीमत पर राशन की सुविधा प्रदान की जा रही है। सीएम योगी के निर्देश पर अखाड़ों-संस्थाओं और कल्पवासियों को मात्र 5 रुपए में आटा और 6 रुपए में चावल उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। इसके लिए मेला क्षेत्र में 138 उचित मूल्य की दुकानों पर राशन उपलब्ध कराया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बार महाकुंभ को दिव्य, भव्य के साथ साथ नव्य रूप देने में लगे हैं। इसके लिए उन्होंने अफसरों को सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। खासकर श्रद्धालुओं के भोजन के लिए इस बार विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने महाकुंभ में आने वालों के लिए अन्न भंडार खोल दिया है। यहां मेला क्षेत्र में उचित मूल्य की 138 दुकानें खोली गई हैं, जहां पर कल्पवासियों के लिए एक लाख बीस हजार सफेद राशन कार्ड बनाने की व्यवस्था की गई है।

इस बार कल्पवासियों, अखाड़ों और संस्थाओं को राशन के लिहाज से बेहद कम कीमत पर राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। महाकुंभ में अखाड़ों-कल्पवासियों को 5 रुपए प्रति किलो की दर से आटा और 6 रुपए प्रति किलो के हिसाब से चावल उपलब्ध कराया जाना है। इसके अलावा कल्पवासियों को 18 रुपए प्रति किलो की दर से चीनी भी उपलब्ध कराई जाएगी। अखाड़ों और संस्थाओं को 800 परमिट की व्यवस्था है।

राशन देने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने भोजन पकाने के लिए भी सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इस काम के लिए सभी 25 सेक्टर्स में एजेंसियां निर्धारित की गई हैं। ये एजेंसियां कल्पवासियों, अखाड़ों और संस्थाओं को नया गैस कनेक्शन प्रदान कर रही हैं। इसके साथ ही उन्हें रिफिल करने का भी पूरा इंतजाम है। इसके अलावा जिन कल्पवासियों के पास अपना खुद का खाली गैस सिलेंडर है, उन्हें भी यहां पर रिफिल करा सकते हैं। तीन विशेष प्रकार के सिलेंडर भरने की व्यवस्था महाकुंभ में की गई है। इनमें 5 किलो, 14.2 किलो और 19 किलो के सिलेंडर भरे जा सकेंगे।

महाकुंभ में अखाड़ों-कल्पवासियों और संस्थाओं को भोजन के लिए किसी प्रकार की समस्या न आने पाए, इस लिहाज से मेला क्षेत्र में 138 दुकानों पर विशेष इंतजाम किया गया है। साथ ही अन्न भंडार के पांच गोदाम भी तैयार किए गए हैं। इन गोदामों पर 6,000 मीट्रिक टन आटा और 4,000 मीट्रिक टन चावल और 2,000 मीट्रिक टन चीनी भी रहेगी।

मेला क्षेत्र में दी जा रही इस विशेष सुविधा के अंतर्गत हर कल्पवासी को 3 किलो आटा, 2 किलो चावल और एक किलो चीनी उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। जनवरी से फरवरी अंत तक राशन की यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही वन नेशन वन कार्ड की सुविधा भी प्राप्त होगी। 100 कुंतल सामान हर दुकान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

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