जब तक महिलाओं को उनका वाजिब हक़ और सम्मान नहीं मिल जाता, कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर संघर्ष करती रहेगी – शोभा ओझा

भोपाल : सोमवार, अप्रैल 20, 2026/ महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा केंद्र की मोदी सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के माध्यम से सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साजिश रची थी, विपक्षी एकजुटता ने उसे विफ़ल कर दिया है, लिहाजा कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संसद में मिली इस जीत का स्वागत करती है।

संसद में आज महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पर हुए मतदान ने स्पष्ट कर दिया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। कुल 528 मतों में से विधेयक के पक्ष में केवल 298 मत पड़े, जबकि विरोध में 230 मत पड़े। जिसके फलस्वरुप यह असंवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो पाया।

यहां कांग्रेस पार्टी यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि कांग्रेस के साथ ही समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में 100 प्रतिशत एकजुट है। हमने सितंबर 2023 में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का समर्थन किया था और आज भी हमारी मांग स्पष्ट है कि महिलाओं को उनका हक़ तुरंत मिलना चाहिए।

महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस का यह रुख कोई नया नहीं है, महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की विचारधारा का मूल हिस्सा रहा है। वर्ष 1989 में ही तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव रखा, इसके बाद 1992-93 में नरसिम्हा राव सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया। इसके बाद वर्ष -2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया।

आज देश भर में जो लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन का हिस्सा हैं -यह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम है। वहीं अगर हम भाजपा की बात करें तो उनकी जो मूल विचारधारा है, वही महिलाओं और उनके सशक्तिकरण के खिलाफ रही है। आरएसएस के सर्वाधिक पूज्य पूर्व सर संघ चालक गुरु गोलवलकर ने महिलाओं की भूमिका को सीमित और पारंपरिक दायरे में बांधने की बात कही थी, जो आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों और लैंगिक समानता के खिलाफ है!

“चिल्ड्रन ऑफ द मदरलैंड” में गोलवलकर ने लिखा है कि “मैं यह मानने को बाध्य हूं कि हमारे लिए और बुरे दिन आने वाले हैं। इतिहास साक्षी है कि जहां कहीं महिलाओं ने शासन किया है, वहां अपराध, असमानता और अराजकता इस प्रकार फैली है कि इसका उल्लेख नहीं किया जा सकता।” यह तो केवल एक उदाहरण है यदि गोलवलकर और संघ के सारे महिला विरोधी शर्मनाक विचारों को यहां प्रस्तुत किया जाए तो इस पत्रकार-वार्ता का समय कम पड़ जाएगा …तो हम समझ सकते हैं कि भाजपा और उनके नेताओं के विचार और आचरण इतने महिला विरोधी क्यों हैं। ऐप्सटीन की फाइलों में जब भाजपा के शीर्ष नेताओं का नाम सामने आया, तब पूरे भारत को ही पूरी तरह से समझ में आ गया कि मणिपुर, उन्नाव, हाथरस, महिला पहलवानों के यौन शोषण और प्रज्वल रेवन्ना की सीडीज़ पर भाजपा की चुप्पी क्यों थी!

देश को यह भी समझ में आ गया कि बृजभूषण शरण सिंह, कुलदीप सेंगर, प्रज्ज्वल रेवन्ना और मध्यप्रदेश में विजय शाह जैसे व्यक्तियों को संरक्षण देने के पीछे भाजपा नेतृत्व की मानसिकता आखिर क्या है! ड़कियों की जासूसी करवाने वाले “स्नूपगेट” विशेषज्ञ यदि आज महिला सुरक्षा की बातें कर रहे हैं तो यह न केवल आश्चर्यजनक और विरोधाभासी है, पूरी तरह से डरावना भी है! ऐसा लगता है मानो भेड़ की खाल में छिपे भेड़िए “शाकाहारी” होने का स्वांग रच रहे हों!

कांग्रेस पार्टी को ऐसा भी लगता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने स्वयं को महिला हितैषी दिखाने का जो असफल नाटक किया है, उसके पीछे कहीं “ऐप्सटीन फाइल्स” के हालिया खुलासे और अन्य आरोप तो नहीं हैं क्योंकि टाइमिंग को देखकर लगता है कि महिलाओं के प्रति भाजपा और उसके नेताओं के असली सच के लगातार उजागर होने से डरी हुई भाजपा और उसके “शीर्ष नेता” अब कुछ “ऐहतियाती कदम” उठाना चाह रहे हैं!

उपरोक्त समूचे संदर्भ के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी की यह दृढ़ मान्यता है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर महिला आरक्षण को “परिसीमन” और “जनगणना” की उलझनों में फ़ंसाया है। सरकार की मंशा महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि परिसीमन के बहाने बिना जातिगत जनगणना के मनमाने तरीके से चुनावी गणितको अपने पक्ष में मोड़ना था।

अपनी कार्यकारी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए मोदी सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन को एक साथ मिलाकर संविधान के ढांचे को बदलने और सारी “एग्जीक्यूटिव पाॅवर” अपने हाथ में लेने का जो निंदनीय और कुत्सित प्रयास किया गया है, वह सीधे तौर पर लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर किया गया हमला था।

यहां हम यह पुनः स्मरण दिलाना चाहते हैं कि देश के नेता प्रतिपक्ष और हमारे नेता राहुल गांधी जी ने बार-बार कहा है कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो वह जनगणना और परिसीमन का इंतजार क्यों कर रही है? आरक्षण को मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के दायरे में आज से ही लागू किया जा सकता है।

कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांगे हैं कि: महिला आरक्षण को मौजूदा 543 सीटों पर तुरंत लागू किया जाए। ओबीसी महिलाओं के लिए उप- कोटा सुनिश्चित किया जाए। जनगणना और परिसीमन को आरक्षण से अलग रखा जाए। महिला सुरक्षा के मामलों में जवाबदेही तय की जाए।

यह लड़ाई केवल एक विधेयक की नहीं है बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और प्रतिनिधित्व की है। मोदी सरकार के लिए यह “नारी शक्ति” के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की असली परीक्षा है। अब “जुमलों” और “नोटिफिकेशन” का समय बीत चुका है, देश की महिलाएं अपना अधिकार मांग रही हैं, मोदी सरकार को यह अच्छे से समझ लेना चाहिए कि देश की महिलाएं अब और प्रतीक्षा नहीं करेंगी। नारी शक्ति का सम्मान खोखले भाषणों से नहीं, मजबूत निर्णयों से होता है और जब तक महिलाओं को उनका वाजिब हक़ और सम्मान नहीं मिलेगा, कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर इसके लिए संघर्ष करती रहेगी।

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