विगत दिनों तेलंगाना के निजामाबाद जिले के अंतर्गत कंडा कुर्थी गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ केशव बलीराम हेडगेवार की स्मृति में निर्मित ‘केशव स्फूर्ति मंदिर’ के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने डा हेडगेवार की विचारधारा और संघ की स्थापना के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। गौर तलब है कि कंडाकुर्थी गांव डा हेडगेवार का पैतृक गांव है। संघ प्रमुख ने कहा कि डा हेडगेवार हिन्दू समाज में एकता की कमी को गुलामी का प्रमुख कारण मानते थे इसीलिए उनके मन में एक ऐसे संगठन की स्थापना के विचार ने जन्म लिया जो हिन्दू समाज की एकजुटता और उसे मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में समर्थ हो। डा हेडगेवार मानते थे कि जब तक हिन्दू समाज संगठित और मजबूत नहीं होगा तब तक उन परिस्थितियों पर विजय पाना कठिन है जो बार बार विदेशी आक्रमणों का कारण बनती रही हैं।
मोहन भागवत ने कहा कि हिन्दू समाज को संगठित, मजबूत, निडर और सद्गुणी बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी गई थी। भागवत ने कहा कि देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए संघ ने केवल राजनीतिक ही नहीं और सशस्त्र प्रतिरोध में भी सहभागिता की। इस अवसर पर संंघ प्रमुख ने अपने इस मंतव्य को दोहराया कि संघ की स्थापना किसी के विरोध में नहीं अपितु सबका काम पूरा करने के लिए हुई है और इसी भावना के साथ संघ के स्वयंसेवक अपना कर्तव्यपालन कर रहे हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि कंडाकुर्थी गांव इस स्फूर्ति मंदिर के शुभारम्भ के साथ भारत और विदेशों में संघ के स्वयंसेवकों तथा डा हेडगेवार के प्रशंसकों के लिए महत्वपूर्ण प्रेरणा केंद्र बनने के लिए तैयार है। इस स्फूर्ति मंदिर की परिकल्पना राष्ट्र भक्ति, अनुशासन एवं प्रतिबद्धता को बढावा देने के उद्देश्य से की गई है। स़ंघ प्रमुख ने केशव स्फूर्ति मंदिर को अनूठा श्रद्धा केंद्र बताते हुए लोगों को यहाँ के बारे में बताने, यहां बार बार आने और यहां की पवित्र मिट्टी से प्रेरणा ग्रहण करने का आह्वान किया। गौरतलब है कि कंडाकुर्थी गांव में निकट भविष्य में एक स्कूल एवं कौशल विकास केंद्र के निर्माण की भी योजना है। इसके अलावा यहां प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण एवं आगंतुकों के लिए आवास सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।
केशव स्फूर्ति मंदिर के भूतल पर संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार की भव्य प्रतिमा की स्थापना के साथ ही उनके अनुकरणीय जीवन पर आधारित एक फोटो गैलरी स्थापित की गई है। प्रथम तल पर भारत माता की मनोहारी प्रतिमा स्थापित है।स्फूर्ति मंदिर के अंदर स्थित एक हाल में बैठकर प्रवासी श्रद्धालु वीडियो के माध्यम से डा हेडगेवार की प्रेरक जीवन यात्रा की झांकी देख सकेंगे। यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर के अंदर निर्मित संग्रहालय में डा हेडगेवार के हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां, उनके द्वारा उपयोग में लाई गई वस्तुएं एवं उनके अनुकरणीय जीवन पर आधारित दुर्लभ पुस्तकों का अवलोकन कर सकेंगे। गौर तलब है कि इस ऐतिहासिक स्फूर्ति मंदिर में भारत माता एवं डा हेडगेवार की जो मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं उनका निर्माण सुप्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगिराज ने किया है जो अतीत में अयोध्या में स्थापित राम लला की भव्य प्रतिमा का निर्माण भी कर चुके हैं।
गोदावरी हरिद्रा और मंजिरा नदियों के संगम पर स्थित कंडाकुर्थी गांव को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नागपुर से लगभग 380 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव पारंपरिक रूप से स्कंद पुरी नाम से विख्यात रहा है। इस गांव का संबंध भगवान् सुब्रमण्य (स्कंद) से है। कालांतर में इस गांव का नाम कंडाकुर्थी हो गया। बताया जाता है कि त्रेता युग में भगवान् राम ने भी अपने वनवास के दौरान इस गांव का भ्रमण किया था। और छत्रपति शिवाजी भी कई बार इस गांव में आए थे। इसी गांव में संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार के कुल देवता केशव स्वामी का मंदिर है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पूर्वपूर्व यहां विघ्नेश्वर मंदिर, सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, रुक्मणी मंदिर, विट्ठलेश्वर मंदिर तथा केशव स्वामी मंदिरों में प्राणप्रतिष्ठा का भव्य कार्यकम आयोजित किया गया था। हाल में ही यहां प्राचीन स्कंद मंदिर का पुनर्निर्माण भी किया गया है। इन मंदिरों के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां दूर दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

कृष्णमोहन झा (लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)




