भारत-अमेरिका ट्रेड डील सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक है – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल : मंगलवार, फरवरी 24, 2026/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी एवं मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। यह समझौता मध्यप्रदेश सहित देश भर के किसानों, युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा तथा भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। कांग्रेस ने वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश में किसान कर्जमाफी का वादा कर सरकार बनाई, लेकिन किसानों का कर्ज पूर्ण रूप से माफ नहीं किया। इसके विपरीत, अनेक किसानों को डिफॉल्टर की स्थिति में पहुंचा दिया गया। भाजपा सरकार ने किसानों को उस स्थिति से बाहर निकालने का कार्य किया है। किसान चौपाल करने वाले राहुल गांधी बताएं दलहन में कौन सी फसलें होती हैं। कांग्रेस ने किसानों के साथ अन्याय किया, हमारी सरकार 365 दिन किसानों के लिए कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को ट्रेड डील का विरोध करने के बजाय मध्यप्रदेश के किसानों से कर्जमाफी के नाम पर किए गए वादाखिलाफी के लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ट्रेड डील का विरोध कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्ष 1956 में मध्यप्रदेश के गठन के बाद से लेकर 2002-03 तक, जब राज्य में कांग्रेस की सरकारें रहीं, तब सिंचाई का रकबा मात्र 7.5 लाख हेक्टेयऱ तक सीमित रहा, जबकि नदियाँ, खेत और संसाधन सब उपलब्ध थे। किसानों के साथ हुए इस अन्याय का परिणाम था कि कृषि विकास ठहरा रहा। इसके विपरीत पिछले वर्षों में हमारी सरकार ने सिंचाई क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार किया है और अल्प अवधि में ही 10 लाख हेक्टेयर की वृद्धि कर यह सिद्ध किया है कि प्रतिबद्धता और नीति स्पष्ट हो तो परिणाम संभव हैं। आज भारत, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तीसरी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है, यह सब किसान, गरीब और सभी वर्गों के कल्याण को केंद्र में रखकर लिए गए निर्णयों का परिणाम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा हमारी सरकार ने लगभग सत्रह विभागों को जोड़कर “किसान कल्याण वर्ष” के अंतर्गत खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। खेत से कारखाने तक, फसल से बागवानी तक और बागवानी से बाजार तक एक सशक्त वैल्यू चेन तैयार कर किसानों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है। हम पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर कृषि आधारित व्यापक चर्चा के लिए भी तैयार हैं, क्योंकि हमारा लक्ष्य राजनीति नहीं, बल्कि किसान और प्रदेश की समृद्धि है। आज ही मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक सम्पन्न हुई। किसान कल्याण वर्ष का किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज ही किसानों एवं कृषि से सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए कार्य करीब 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच साल तक निरंतर रखने को मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि अब यह पांच योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी और इसका सर्वाधिक लाभ मध्यप्रदेश के किसानों को मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं उनके समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष“ के रूप में मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश 24.51 मिलियन टन गेहूं उत्पादन कर लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा, 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।

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