शिक्षा और व्यापार विकास में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : कृष्णमोहन झा

मीडिया शिक्षा, उद्योग और युवाओं के बीच संवाद का सशक्त माध्यम बने : आठवें नेशनल एजुकेशन कॉन्क्लेव में वरिष्ठ पत्रकार ने रखे विचार
नई दिल्ली / वरिष्ठ पत्रकार लेखक विचारक और देश के जानेमाने राजनैतिक विश्लेषक कृष्णमोहन झा ने कहा है कि शिक्षा और व्यापार विकास को नई गति देने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा युवाओं को ज्ञान और क्षमता प्रदान करती है, उद्योग उन्हें रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराते हैं, जबकि मीडिया इन दोनों के बीच संवाद, सूचना और जागरूकता का सशक्त माध्यम बन सकता है। विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए शिक्षा, उद्योग और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की आवश्यकता है।
झा शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित ली मेरिडियन होटल में इंटरनेशनल एक्सीलेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ICCI) तथा फेम फाइंडर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठवें नेशनल एजुकेशन कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय ‘इंडस्ट्री–एकेडमिया इंटरफेस’ था। श्री झा ने ‘शिक्षा और व्यापार विकास में मीडिया की भूमिका’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
अपने उद्बोधन में कृष्णमोहन झा ने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया का दायित्व केवल समाचारों के प्रसारण तक सीमित नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता, कौशल विकास, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े विषयों को जन चर्चा का हिस्सा बनाना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मीडिया यदि शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच संवाद को प्रभावी बनाता है, तो इससे विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं और उद्योगों को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल मानव संसाधन प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
झा ने कहा कि आज उद्योगों की आवश्यकताएं तेजी से बदल रही हैं। तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नए व्यावसायिक क्षेत्रों के विस्तार के कारण युवाओं के लिए केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और कार्यक्षेत्र का अनुभव भी आवश्यक है। ऐसे में मीडिया को उन प्रयासों और नवाचारों को सामने लाना चाहिए, जो शिक्षा को व्यावहारिक बनाने तथा विद्यार्थियों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और इंटर्नशिप जैसी पहलों से शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। मीडिया इन पहलों की जानकारी विद्यार्थियों और अभिभावकों तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन, उपलब्धियों और चुनौतियों पर भी तथ्यपरक चर्चा कर सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार ने व्यापार विकास में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वसनीय व्यावसायिक पत्रकारिता बाजार, निवेश, सरकारी नीतियों और उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां समाज तक पहुंचाती है। बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों की सफलता की कहानियों को सामने लाकर मीडिया नए अवसरों के प्रति जागरूकता पैदा कर सकता है। इससे युवाओं में नौकरी तलाशने के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं के प्रति भी रुचि बढ़ सकती है।उन्होंने विज्ञापन और स्वतंत्र पत्रकारिता के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि विज्ञापन किसी उत्पाद या सेवा के प्रचार का माध्यम है, जबकि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता तथ्यों, पारदर्शिता तथा जनहित के आधार पर विश्वसनीयता स्थापित करती है। व्यापार और उद्योग के विकास के लिए बाजार में विश्वास का वातावरण आवश्यक है और जिम्मेदार पत्रकारिता इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
झा ने डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि नई तकनीकों ने सूचना के प्रसार को तेज और व्यापक बनाया है। हालांकि, इसके साथ भ्रामक सूचनाओं और अपुष्ट दावों की चुनौती भी बढ़ी है। इसलिए मीडिया को तकनीकी बदलावों को अपनाने के साथ-साथ तथ्य-जांच, निष्पक्षता और पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना होगा।
कृष्णमोहन झा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल मानव संसाधन, नवाचार, रोजगार सृजन और उद्यमिता को भी मजबूत करना होगा। मीडिया युवाओं को प्रेरित करने, शिक्षा और उद्योग के बीच सफल साझेदारियों को सामने लाने तथा विकास से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
झा ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा संस्थान ज्ञान और कौशल प्रदान करें, उद्योग युवाओं के लिए अवसर एवं व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराएं और मीडिया इन दोनों के बीच विश्वसनीय संवाद का सेतु बने, तो भारत की विकास यात्रा को नई गति मिल सकती है।
आठवें नेशनल एजुकेशन कॉन्क्लेव का आयोजन 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के जनपथ स्थित ली मेरिडियन होटल में किया गया। इसका आयोजन इंटरनेशनल एक्सीलेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ICCI) तथा फेम फाइंडर्स के सौजन्य से हुआ। सम्मेलन में शिक्षा, उद्योग, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार कृष्णमोहन झा के साथ आर.के. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन सीए नरेश चंद्र बंसल, आई बिजनेस इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. श्वेता सौरभ, महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एन.के. सिन्हा, एएएफटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संदीप मरवाह, शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र, सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन सीए दीन दयाल अग्रवाल, एआईसीटीई के मुख्य समन्वय अधिकारी डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश पचौरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। कार्यक्रम के स्वागत वक्ताओं में डॉ. निमित गुप्ता भी शामिल थे।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में शिक्षा को उद्योग से जोड़ने, कौशल विकास, तकनीकी नवाचार और भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में उद्योग एवं शिक्षा जगत के अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंत में संस्था के संयोजक मानवेंद्र सिंह ने अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।



