मध्यप्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियाँ-टैक्स और दामों की बढ़ोतरी के नाम पर खुली लूट: मुकेश नायक

भोपाल : मंगलवार, अप्रैल 1, 2025/ मध्यप्रदेश की जनता आज सरकार की लूट, छल और शोषण का शिकार बन रही है। बजट पेश करते वक्त सरकार ने बड़े गर्व से दावा किया था कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, लेकिन 1 अप्रैल 2025 से लागू प्रॉपर्टी गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी, बिजली दरों में 3.46 प्रतिशत की वृद्धि, टोल टैक्स, संपत्ति कर, सफाई कर, प्रकाश कर और जल कर में संभावित वृद्धि इस झूठ को बेनकाब करती है। यह खुला छल और जनता को मूर्ख बनाने का दुस्साहस नहीं तो और क्या है? सरकार जनता को राहत देने की बजाय उसकी जेब पर डाका डालने और वसूली करने में लगी है।

प्रॉपर्टी गाइडलाइन दरों में वृद्धि से पंजीयन शुल्क और उस पर लगने वाला 18 प्रतिशत जीएसटी आसमान छू रहा है। इसका नतीजा यह है कि गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अपने सपनों का छोटा सा प्लॉट खरीदना अब असंभव हो गया है। सरकार की 2 लाख रुपये की आवास सब्सिडी, जो गरीबों को घर दिलाने का वादा करती थी, अब बढ़ी कीमतों के आगे हवा-हवाई साबित हो रही है। क्या सरकार गरीबों का हक छीनने और उनके सपनों को कुचलने की साजिश रच रही है? यह नीति गरीब को गरीब बनाए रखने का षड्यंत्र नहीं तो क्या है?

बिजली दरों में 3.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी को सरकार ‘‘मामूली’’ बता रही है, लेकिन यह उस गरीब के लिए भारी बोझ है, जो अपने बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में दिन-रात पसीना बहाता है। 100 यूनिट पर 24 रुपये की अतिरिक्त चपत छोटी नहीं है जब आपकी जेब पहले ही खाली हो। स्लैब बदलने की चाल से बिजली बिल को और महंगा करने की साजिश क्या जनता को मूर्ख बनाने का प्रयास नहीं है? टोल टैक्स में वृद्धि से रोजमर्रा का सफर महंगा हो गया है, जल कर बढ़ने से पीने के पानी की कीमत चुकानी पड़ रही है, और संपत्ति कर, सफाई कर व प्रकाश कर की मार ने जनता की कमर तोड़ दी है। यह हर मोर्चे पर बढ़ोतरी का खेल सरकार की जनविरोधी मंशा को साफ उजागर करता है।

महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता जब-जब इस सरकार से राहत की उम्मीद करती है, ये मोहन की दोहन वाली सरकार आफत बनकर टूट पड़ती है। युवा बेरोजगार सड़कों पर भटक रहे हैं, किसान कर्ज में डूबा है, मजदूरों की मजदूरी महंगाई के आगे कम पड़ रही है, और मध्यम वर्ग की बचत खत्म हो रही है। ऐसे में सरकार राहत देने की बजाय टैक्स और दाम बढ़ाकर जनता का खून चूस रही है। यह पैसा कहाँ जा रहा है? सड़कें टूटी पड़ी हैं, बिजली कटौती का सिलसिला थमा नहीं है, पानी की किल्लत हर गली-मोहल्ले में दिखती है, और सफाई व्यवस्था का हाल यह है कि कचरे के ढेर शहर की पहचान बन गए हैं। फिर यह बेशर्म वसूली किसके लिए? क्या यह पैसा नेताओं की तिजोरी भरने या उनके शाही ठाठ-बाट के लिए जमा किया जा रहा है?

बजट में झूठे वादे, विकास के ढोंग और राहत के सपने दिखाकर जनता की मेहनत की कमाई छीनना धोखा नहीं तो क्या है? यह गरीबों के साथ क्रूर मजाक है, मध्यम वर्ग के साथ विश्वासघात है, और मध्यप्रदेश की जनता के सब्र का इम्तिहान है। सरकार जनता को छलने और मूर्ख बनाने का यह दुस्साहस क्यों कर रही
है? क्या उसे लगता है कि जनता चुपचाप यह अन्याय सहती रहेगी?

मैं, मुकेश नायक, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष के रूप में, इस लूटतंत्र के खिलाफ आवाज उठाता हूँ और सरकार से मांग करता हूँ कि इन जनविरोधी फैसलों को तुरंत वापस लिया जाए। जनता को तत्काल राहत दी जाए, वरना यह सरकार तैयार रहे-जनता सड़कों पर उतरेगी और इस छल, शोषण और लूट का हिसाब लेगी। सरकार यह न भूले-जनता सब देख रही है, और उसका सब्र अब जवाब दे रहा है।

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