‘‘कर्मश्री’’ का हिंदू नववर्ष उत्सव : अखिल भारतीय कवि सम्मलेन में देश के ख्यातनाम कवि करेंगे कविता पाठ

भोपाल : बुधवार, मार्च 26, 2025/ धर्म, संस्कृति, समाज, पर्यावरण जैसे विभिन्न विषयों के प्रति जनजागरण के लिए सक्रिय विधायक रामेश्वर शर्मा की संस्था ‘‘कर्मश्री’’ परंपरानुसार हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में इस बार भी विराट आयोजन करने जा रही है। संस्था ने इसे ‘‘हिंदू नववर्ष उत्सव’’ का नाम दिया है। जिसके तहत हिन्दू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुड़ी पड़वा और चैटी चांद की पूर्व संध्या पर राजधानी भोपाल के ‘‘अटल पथ’’ पर प्लैटिनम प्लाजा माता मंदिर तात्या टोपे नगर में 29 मार्च शनिवार को रात 8 बजे से ‘‘कर्मश्री’’ के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का विराट होने जा रहा है। भारतीय नववर्ष पर ‘‘कर्मश्री’’ अध्यक्ष एवं हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा द्वारा परंपरागत रूप से आयोजित किए जाने वाले अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का यह लगातार (कोरोनाकाल को छोड़कर) 25 वां वर्ष है। इस आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए आयोजक संस्था ‘‘कर्मश्री’’ के अध्यक्ष एवं हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा प्रतिवर्षगुडी पड़वा, चैत्र नवरात्र और चैटी चांद जैसी पावन तिथियों के अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन लगातार 24 वर्षों से किया जा रहा है, इस बार आयोजन का 25 वां वर्ष है।

उन्होने कहा कि हम प्रतिवर्षानुसार इस बार भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत् 2082 नव संवत्सर के स्वागत में भोपाल के ‘‘अटल पथ’’ पर काव्यरस में सरोबार होकर पूरे शहर और समाज के साथ मिलकर नववर्ष का स्वागत करेंगे । शर्मा ने बताया कि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न स्थानों से आए ख्यातनाम कवि शिरकत करेंगे जिनमें शशिकांत यादव शशि, देवास (सबरस, मंच संचालन), पद्यश्री डॉ सुनील जोगी (हास्य सम्राट) नई दिल्ली, पद्यश्री डॉ सुरेंद्र दुबे (हास्य व्यंग्य) रायपुर, कविता तिवारी (वीर रस) लखनउ, डॉ अनिल चौबे (हास्य व्यंग्य) वाराणसी, सुदीप भोला (पैरोडीकार) जबलपुर, गौरी मिश्रा (गीत गजल) उत्तराखंड, अमन अक्षर (फिल्मी गीतकार) इंदौर, विकास बौखल (हास्य व्यंग्य) बाराबंकी, श्वेता सिंह (गीज गजल) बड़ौदरा और मुकेश मासूम (हास्य पैराडी) खातेगांव आदि कविगण शामिल हैं। कवि सम्मेलन का मंच संचालन सर्वरस के विख्यात कवि एवं मंच संचालक शशिकांत यादव शशि देवास द्वारा किया जाएगा। कवि सम्मेलन में 30 हजार से अधिक श्रोता मौजूद रहेंगे।

कर्मश्री अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने बताया कि कवि सम्मेलन में महिलाओं और बुजुर्गों के बैठने के लिए पृथक से विशेष व्यवस्था की जा रही है। वयोवृद्ध एवं निःशक्तजनों के लिए भी कुर्सियों पर बैठक व्यवस्था की जाएगी। उन्होने बताया कि पुरूषों एवं महिलाओं के बैठने के लिए पृथक-पृथक बैठक व्यवस्था की जा रही है। महिलाओं एवं बुजुर्गों की बैठक व्यवस्था को पूरी तरह से सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने के लिए योजना बनाई गई है। उन्होने बताया कि बैठक व्यवस्था पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर है अतः सामने स्थान ग्रहण करने के लिए समय से काफी पहले पहुंचना चाहिए। श्री शर्मा ने भोपाल वासियों से अधिकाधिक संख्या में नववर्ष के अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में उपस्थित होकर काव्य रस का आनंद उठाने की अपील की है।

हिंदू नववर्ष उत्सव के आयोजक ‘‘कर्मश्री संस्था के अध्यक्ष हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि भारतवर्ष का अतीत काफी वैभवशाली रहा है। यहां की संस्कृति और सभ्यता गौरवशाली है। इसी गौरवशाली सभ्यता और संस्कृति का पहला सबसे बड़ा उत्सव हिंदू नववर्ष है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होने वाला यह नववर्ष ही प्रमाणिक नववर्ष हैं। नव सम्वतर से वर्ष की शुरूआत होने के प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक तथ्य भी मिलते हैं। ऋतु परिवर्तन, फंसलों का पकना जैसे नववर्ष के आगमन के कई संकेत प्रकृति स्वयं देती है। शर्मा ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर नववर्ष पूरे भारत में उत्तर से दक्षिण तक विभिन्न राज्यों की संस्कृतियों में विभिन्न नामों से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह ‘गुड़ी पड़वा’ के नाम से मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में यह ‘उगादी’ के नाम से मनाया जाता है। इसी दिन कश्मीर में ‘नवरेह’ के नाम से नववर्ष मनाया जाता है। सिंधी समुदाय ‘चेटी चंड’ के नाम से भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में नववर्ष मनाता है। इसी तरह से भारत वर्ष की विभिन्न संस्कृतियों में हिंदू पंचाग के आधार पर ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नया वर्ष मनाया जाता है। शर्मा ने कहा कि अपने वैभवशाली अतीत के गौरवजागरण और नई पीढ़ि को इससे परिचित कराने के लिए ‘‘कर्मश्री’’ विभिन्न आयोजन करती है जिसमें से एक आयोजन यह ‘अखिल भारतीय कवि सम्मलेन’ है जो कि हिंदू नववर्ष पर आयोजित किया जाता है। इस आयोजन के माध्यम से हम पूरे हिंदू समाज को साथ लेकर नववर्ष का उत्सव मनाते है। उन्होने कहा कि सभी नागरिक बंधुओं को सपरिवार कवि सम्मेलन में आना चाहिए और खास तौर से अपने बच्चों को जरूर लाना चाहिए जिससे की उनका अपनी संस्कृति-सभ्यता से जुड़ाव हो और कला-साहित्य के प्रति रूझान उत्पन्न हो सके। बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कारों की दी गई शिक्षा बच्चों का भविष्य और अपना परिवार सुरक्षित करेगी।

नवसम्वत्सर एवं चैत्र प्रतिपदा का भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। ‘‘कर्मश्री’’ अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने इस पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि यह तिथि अपने-आप में विशेष महत्व रखती है। उन्होने बताया कि पुराणों में उल्लेख है कि चैत्र प्रतिपदा को ही सृष्टि का निर्माण हुआ था अतः यह सृष्टि के आरंभ का दिवस है। इस दिन शक्ति की अराधना के पर्व ‘‘नवरात्रों’’ का आरंभ होता है, इसीलिए यह दिन अपने आप में पावन दिवस है। इस दिन से हमारा पंचाग आरंभ होता है। कई महापुरूषो की जयंती, रामनवमी, महावीर जयंती, बौद्ध पूर्णीमा, गुरूनानक जयंती, झूलेलाल जयंती जैसे पावन त्यौहार भी इसी संवत्सर की तिथियों के आधार पर पडते है। जबकि सनातन, जैन, बौद्ध सिख परंपरा में भगवान एवं महापुरूषों की जयंती व उत्सव इसी पंचाग से मनाए जाते हैं। उन्होने बताया कि हमारे धर्म और संस्कृति में तिथियों का विशेष महत्व रेखांकित किया गया है और चैत्र प्रतिपदा को विशेष महत्व की पावन तिथि के रूप में उल्लेखित किया गया है।

‘‘कर्मश्री’’ अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने समस्त भोपाल वासियों से हिंदू नववर्ष को महोत्सव के रूप में मनाने का आग्रह करते कहा कि यह हमारा अपना नववर्ष है जिसका स्वागत घर-घर में उत्साह से होना चाहिए। उन्होने कहा कि नववर्ष के स्वागत के लिए विभिन्न तरीके अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले नववर्ष का स्वागत प्रत्येक भारतीय सर्वप्रथम अपने ही परिवार में मंगल कामनाओं व बधाई के साथ करें । इसके उपरांत विकास एवं तकनीक के आयामों को भी सहभागी बनाते हुऐ ग्रीटींग कार्ड ,एसएमएस, ईमेल, मोबाइल, फेसबुक, एक्स (ट्वीटर), इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया पर भी नववर्ष की बधाई दें। सभी को यथा-सामर्थ्य नव संवत्सर के स्वागत का तरीका अपनाना चाहिए। बैनर, पोस्टर, फ्लैक्स आदि भी लगाए जा सकते हैं। नव सम्वत्सर के स्वागत में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन भी किए जा सकते हैं। सांयकाल अपने घरों में दीपक जलाकर और रोशनी कर भी नववर्ष का उत्सव मनाना चाहिए। यथासंभव आतिशबाजी भी करनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि नव सम्वत्सर का स्वागत प्रकृति का स्वागत है, यह नवरात्र आरंभ पर देवी माता का स्वागत है। अतः हमें इस पावन पर्व को उत्साहपूर्वक मना कर प्रकृति और देवी माता की कृपा प्राप्त करनी चाहिए। नववर्ष के स्वागत में घर घर में आयोजनों की धूम होनी चाहिए। नववर्ष का स्वागत परिवार सहित उत्सव मनाते हुए करना चाहिए और इसकी शुरूआत ‘‘कर्मश्री’’ के कवि सम्मेलन में शामिल होकर भी की जा सकती है।

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