नई दिल्ली : रविवार, दिसम्बर 15, 2024/ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल संविधान की 75 वर्ष की गौरव यात्रा पर लोकसभा में आयोजित चर्चा के दौरान विकसित भारत के लिए देश के सामने 11 संकल्प रखे। इसमें नागरिक कर्तव्य, सबका विकास, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, आरक्षण मिलता रहे और यह धर्म के आधार पर न हो, जैसे संकल्प शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने लोकसभा में देर शाम तक चली चर्चा में अपने वक्तव्य में कहा, “आज मैं इस सदन के पवित्र मंच से 11 संकल्प सदन के सामने रखना चाहता हूं। चाहे नागरिक हो या सरकार हो सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें। हर क्षेत्र, हर समाज को विकास का लाभ मिले, सबका साथ-सबका विकास हो। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस हो, भ्रष्टाचारी की सामाजिक स्वीकार्यता न हो। देश के कानून, देश के नियम देश की परंपराओं के पालन में देश के नागरिकों को गर्व होना चाहिए। गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हो, देश की विरासत पर गर्व हो। देश की राजनीति को परिवारवाद से मुक्ति मिले। संविधान का सम्मान हो, राजनीति स्वार्थ के लिए संविधान को हथियार न बनाया जाए। संविधान की भावना के प्रति समर्पण रखते हुए जिनको आरक्षण मिल रहा है, उसको न छीना जाए और धर्म के आधार पर आरक्षण की हर कोशिश पर रोक लगे। महिला नेतृत्व में विकास हो और भारत दुनिया के लिए मिसाल बने। राज्य के विकास से राष्ट्र का विकास हमारा मंत्र बने। एक भारत, श्रेष्ठ भारत का ध्येय सर्वोपरि हो।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान के 75 वर्ष की यात्रा यादगार रही है। यह विश्व के सबसे महान और विशाल लोकतंत्र की यात्रा है। संविधान निर्माता की दूरदृष्टि के कारण ही हम आगे बढ़े हैं और 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र और लोकतांत्रिक अतीत बहुत समृद्ध और विश्व के लिए प्रेरक रहा है। इसी कारण से भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि हमारा संविधान भारत की एकता का आधार है। विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता भारत की एकता है। 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनने पर लोकतंत्र और संविधान को मजबूती मिली है। गरीबों को मुश्किलों से मुक्ति मिले, उनकी सरकार का यह मिशन और संकल्प है। अगर हम अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करें तो कोई भी हमें विकसित भारत बनने से नहीं रोक सकता है।
पीएम ने कहा कि आज हमारी हर योजना महिला केंद्रित होती हैं। यह बहुत ही अच्छा सहयोग है कि संविधान के 75 वर्ष पूरे होने पर देश के शीर्ष राष्ट्रपति पद पर एक आदिवासी महिला विराजमान है। हमारे सदन में और मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज भारत बहुत तेज गति से विकास कर रहा है, जल्द ही भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प है कि आजादी की शताब्दी मनाने पर देश को विकसित भारत बना कर रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 370 का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि यह अनुच्छेद देश की एकता में दीवार बनकर पड़ा था। इसलिए हमने अनुच्छेद 370 को जमीन में गाड़ दिया। उन्होंने कहा कि बहुत से कम लोगों को 35ए के बारे में पता है। भारत के संविधान का अगर कोई पहला पुत्र है तो यह संसद है लेकिन 35ए के माध्यम से संसद का भी गला घोटने का काम किया गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कांग्रेस पार्टी उनको तो संविधान शब्द भी उनके मुंह में शोभा नहीं देता है। इसीलिए जो अपनी पार्टी के संविधान को नहीं मानते हैं। जिन्होंने अपनी पार्टी के संविधान को कभी स्वीकार नहीं किया है। क्योंकि संविधान को स्वीकार करने के लिए लोकतांत्रिक स्पिरिट लगता है जी। जो इनकी रगों में नहीं है सत्तावाद और परिवारवाद भरा पड़ा है। अब आप देखिए जो कैसे शुरूआती कितनी गड़बड़ हुई है। मैं कांग्रेस की बात कर रहा हूं। 12 कांग्रेस के प्रदेश के कमेटियों ने 12 प्रदेश कॉमेडियन ने, सरदार पटेल के नाम पर सहमति दी थी। नेहरू जी के साथ एक भी कमेटी नहीं थी, नोट ए सिंगल। संविधान के तहत सरदार साहब ही देश के प्रधानमंत्री बनते। लेकिन लोकतंत्र में श्रद्धा नहीं, खुद के संविधान पर विश्वास नहीं, खुद के ही संविधान को स्वीकारना नहीं और सरदार साहब देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सके और यह बैठ गए। जो लोग अपनी पार्टी के संविधान को, जो लोग अपनी पार्टी के संविधान को नहीं मानते, वो कैसे देश के संविधान को स्वीकार कर सकते हैं।
जो लोग संविधान में लोगों के नाम ढूंढते रहते हैं, मैं जरा बताना चाहता हूं। कांग्रेस पार्टी के एक अध्यक्ष हुआ करते थे और वह अति पिछड़े समाज से आते थे, अति पिछड़े, पिछड़े भी नहीं अति पिछड़े। अति ही पिछड़े समाज से आते हुए उनके अध्यक्ष श्रीमान सीताराम केसरी जी, कैसा अपमान किया गया। कहते हैं बाथरूम में बंद कर दिया गया। उठा करके फुटपाथ पर फेंक दिया गया। अपनी पार्टी के संविधान में ऐसा कभी नहीं लिखा गया, लेकिन अपनी पार्टी के संविधान को ना मानना लोकतंत्र की प्रक्रिया को ना मानना और पूरी कांग्रेस पार्टी पर एक परिवार ने कब्जा कर लिया। लोकतंत्र को नकार दिया।
संविधान के साथ खिलवाड़ करना, संविधान के स्पिरिट को तहस-नहस करना, यह कांग्रेस की रगों में रहा है। हमारे लिए संविधान उसकी पवित्रता, उसकी सुचिता, हमारे लिए सर्वोपरि है और यह शब्दों में नहीं है जब-जब हमें कसौटी पर कसा गया है हम तप करके निकले हुए लोग हैं। मैं उदाहरण देना चाहता हूं, 1996 में सबसे बड़े दल के रूप में भारतीय जनता पार्टी जीत करके आई, सबसे बड़ा दल था और राष्ट्रपति ने संविधान की भावना तहत सबसे बड़े दल को प्रधानमंत्री की शपथ के लिए बुलाया और 13 दिन सरकार चली। अगर हमें संविधान के स्पिरिट के प्रति हमारी भावना ना होती तो हम भी यह बांटो, वो बांटो, ये दे दो, वो दे दो। इसको डेप्युटी पीएम बना दो, इसको ढिकना बना दो। हम भी सत्ता सुख भोग सकते थे, लेकिन अटल जी ने सौदेबाजी का रास्ता नहीं चुना, संविधान के सम्मान का रास्ता चुना और 13 दिन के बाद इस्तीफा देना स्वीकार कर दिया। यह ऊंचाई है हमारे लोकतंत्र की। इतना ही नहीं 1998 में एनडीए की सरकार थी। सरकार चल रही थी लेकिन कुछ लोगों को हम नहीं तो कोई नहीं यह जो एक परिवार का खेल चला है, अटल जी के सरकार को स्थिर करने के लिए खेल चले गए, वोट हुआ खरीद फरोख्त तब भी हो सकती थी, बाजार में माल तब भी बिकता था। लेकिन संविधान की भावना के प्रति समर्पित अटल बिहारी वाजपयी जी की सरकार ने एक वोट से हारना पसंद किया, इस्तीफा दिया, लेकिन असंवैधानिक पद स्वीकार नहीं किया। यह हमारा इतिहास है, यह हमारे संस्कार है, यह हमारी परंपरा है और दूसरी तरफ अदालत ने भी जिस पर ठप्पा मार दिया कैश फॉर वोट का कांड एक लघुमति सरकार को बचाने के लिए संसद में नोटों के ढेर रखे गए। असंवैधानिक तरीका सरकार बचाने के लिए भारत के लोकतंत्र की भावना को बाजार बना दिया गया। वोट खरीदे गए।




