एक अरब श्रीकृष्ण नाम जप का संकल्प पूर्ण कर भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने तप, त्याग और अनुशासन का अद्वितीय आदर्श प्रस्तुत किया – अमित शाह

नई दिल्ली : बुधवार, फरवरी 18, 2026/ केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पश्चिम बंगाल के नदिया में परमपूज्य श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर जी के 152वें जयंती समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मायापुर में भक्तिसिद्धांत प्रभुपाद और भक्तिवेदांत प्रभुपाद ने ही चैतन्य महाप्रभु द्वारा शुरु किए गए भक्ति परंपरा को न सिर्फ आगे बढ़ाया बल्कि उसे आधुनिक बनाकर युवाओं और पूरे विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का काम किया। चैतन्य महाप्रभु ने अपने जीवनकाल में देश और दुनिया में अज्ञान के अंधकार से पीड़ित लाखों लोगों के उद्धार के लिए भक्ति का रास्ता प्रशस्त किया। शाह ने कहा कि जब व्यक्ति अपने अस्तित्व को विलीन कर श्रीकृष्णमय हो जाता है तो सब अच्छा हो जाता है और इसी रास्ते पर चैतन्य महाप्रभु ने कीर्तन, भक्तिसंगीत, नृत्य और गीता का गूढ़ संदेश बहुत सरल तरीके से जन-जन तक पहुँचाकर आध्यात्मिक चेतना का जागरण किया। उन्होंने कहा कि उसी आंदोलन को परमपूजनीय भक्तिसिद्धांत प्रभुपाद और भक्तिवेदांत प्रभुपाद ने न सिर्फ आगे बढ़ाया बल्कि इसे आधुनिकता के साथ जोड़कर युवाओं और पूरे विश्व के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त किया।

अमित शाह ने कहा कि आज चैतन्य महाप्रभु के भक्ति-सेनापति और गौड़ीय मत के संस्थापक भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती है। उन्होंने कहा कि एक अरब श्रीकृष्ण नाम जप का संकल्प पूर्ण कर भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने तप, त्याग और अनुशासन का अद्वितीय आदर्श प्रस्तुत किया। शाह ने कहा कि ऐसा करके उन्होंने अपने पूरे जीवन को श्रीकृष्णमय कर दिया। भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने धर्म को रूढ़ियों और संकीर्णताओं से मुक्त करते हुए यह सिद्ध किया कि आधुनिकता धर्म विरोधी नहीं, बल्कि उसकी साथी है। गृह मंत्री ने कहा कि भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने प्रिंटिंग प्रेस को वृहद मृदंग का नाम देकर यह बताया कि प्रिंटिंग प्रेस में छपी पुस्तक सात समुंदर पार जाकर भी भक्ति का प्रचार करती है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति अचल और अनन्य हो तभी रुढ़ियों को तोड़ने का साहस आ सकता है। जिनके मन में ईश्वर हैं वे अपने आप को सभी का दास कहते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु वही है जो सबके सेवक के भाव के साथ शिष्य को छोटे से बड़ा करे। उन्होंने कहा कि भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर सच्चे गुरु थे और उन्होंने ही गुरुपद का परिचय पूरे विश्व को कराया। भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने जाति के बंधनों को तोड़ने के लिए भी कई काम किए। शाह ने कहा कि वैराग्य का मतलब सिर्फ संसार का त्याग कर देना नहीं, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों को छोड़कर समस्त संसार को श्रीकृष्ण की भक्ति में लगाना भी वैराग्य है।

अमित शाह ने कहा कि कई लोग भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर को जीवंत विश्वकोष भी कहते हैं। उन्हें गणित और संस्कृत का बहुत ज्ञान था लेकिन फिर भी उन्होंने सब कुछ श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर भक्ति मार्ग पर पूरा जीवन व्यतीत किया। उन्होंने कहा कि इस आध्यात्मिक केन्द्र से न सिर्फ देश बल्कि पूरे विश्व के भक्तजनों को बहुत बड़ी उम्मीद है कि यह केन्द्र विश्व के कल्याण का कारण बनेगा। मायापुर में इस्कॉन का विकसित हो रहा आध्यात्मिक केंद्र विश्व कल्याण का वैश्विक धाम बनेगा। शाह ने कहा कि भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर के जीवन में बहुत बड़े कामों में से एक था कि उन्होंने भक्तिवेदांत प्रभुपाद जी जैसे शिष्य को तैयार कर इस संप्रदाय को आगे बढ़ाने का काम किया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भक्तिसिद्धांत प्रभुपाद और भक्तिवेदांत प्रभुपाद के जीवन का ही कर्मफल है कि आज इस्कॉन पूरी दुनिया में सनातन धर्म की ध्वजा फहरा रहा है। उन्होंने कहा कि हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर ने मतुआ महासंघ के माध्यम से समाज कल्याण और सामाजिक समरसता को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि इस्कॉन ने सबको गीता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी भारत आने वाले हर राष्ट्राध्यक्ष या मंत्री को भेंटस्वरूप गीता ही देते हैं। शाह ने कहा कि इस्कॉन ने न सिर्फ हमारी परंपराओं और शास्त्रों का प्रचार-प्रसार कर भक्ति आंदोलन को मज़बूत किया बल्कि सेवा के क्षेत्र में भी बहुत बड़े काम किए हैं। उन्होंने कहा कि आपदाओं में राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण के कार्यों से इस्कॉन राष्ट्र की सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुफ्त भोजन वितरण, अस्पताल, कॉलेज, इकोलॉजी के सभी सिस्टम को मज़बूत करने और भारतीय उत्सवों को फिर से युवाओं तक पहुंचाने में इस्कॉन ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

 

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