जीवन में स्वस्थ्य रहने रात्री भोजन का त्याग करना आवश्यक है। जैन धर्म में तो हर जैन के तीन आवश्यक लक्ष्य बताये है। प्रतिदिन मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करना, पानी छानकर पीना और रात्री भोजन का त्याग करना है। जैन धर्म के अलावा वैज्ञानिक आधार पर भी रात्री भोजन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक बताया है।
पशु पक्षी भी रात्री में कुछ नहीं खाते हैं। रात्री भोजन नहीं करने से पशु पक्षी कभी बीमार नहीं होते हैं। वे स्वस्थ्य रहते हैं। किसी भी चिड़िया को डायबिटीज नहीं होती। किसी भी बन्दर को हार्ट अटैक नहीं आता। कोई भी जानवर न तो आयोडीन नमक खाता है और न ब्रश करता है, फिर भी किसी को थायराइड नहीं होता और न दांत खराब होता है। बन्दर शरीर संरचना में मनुष्य के सबसे नजदीक है, बस बंदर और आप में यही फर्क है कि बंदर बोलता नहीं है और बंदर के पूँछ है आप के नहीं है, बाकी सब कुछ समान है। तो फिर बंदर को कभी भी हार्ट अटैक, डायबिटीज , उच्च रक्तचाप, क्यों नहीं होता है? एक पुरानी कहावत है बंदर कभी बीमार नहीं होता और यदि बीमार होगा तो जिंदा नहीं बचेगा मर जाएगा। बंदर बीमार क्यों नहीं होता? हमारे एक मित्र बताते हैं कि एक बहुत बड़े , प्रोफेसर हैं, मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं। उन्होंने एक बड़ा गहरा रिसर्च किया कि बंदर को बीमार बनाओ। तो उन्होने तरह – तरह के वायरस और वैक्टीरिया बंदर के शरीर में डालना शुरू किया, कभी इंजेक्शन के माध्यम से कभी किसी और माध्यम से। वो कहते है, मैं लगातार 15 वर्ष प्रयास करता रहा, लेकिन असफल रहा , बंदर को कुछ नहीं हुआ। मित्र ने प्रोफेसर से कहा कि आप यह कैसे कह सकते है कि बंदर को कुछ नहीं हो सकता ? तब उन्होंने एक दिन यह रहस्य की बात बतायी कि बंदर का जो आर एच फेक्टर है वह सबसे आदर्श है। कोई डॉक्टर जब आपका आर एच फेक्टर नापता है, तो वह बंदर के ही आर एच फेक्टर से तुलना करता है , वह डॉक्टर आपको बताता नहीं यह अलग बात है। उसका कारण यह है कि, उसे कोई बीमारी आ ही नहीं सकती। उसके खून में कभी कॉलेस्टेरॉल नहीं बढ़ता , कभी ट्रायग्लेसराइड नहीं बढ़ती , न ही उसे कभी डायबिटीज होती है। शुगर को कितनी भी बाहर से उसके शरीर में इंट्रोडयूस करो, वो टिकती नहीं। तो वह प्रोफेसर साहब कहते हैं कि यही चक्कर है , कि बंदर सबेरे सबेरे ही भरपेट खाता है। जो आदमी नहीं खा पाता है , इसीलिए उसको सारी बीमारियां होती है। सूर्य निकलते ही सारी चिड़िया , सारे जानवर खाना खाते हैं। जब से मनुष्य इस ब्रेकफास्ट , लंच , डिनर के चक्कर में फंसा तबसे मनुष्य ज्यादा बीमार रहने लगा है। प्रोफेसर रवींद्रनाथ शानवाग ने अपने सभी मरींजों से कहा कि सुबह सुबह भरपेट खाओ। उनके मरीज बताते है कि, जबसे उन्हौने सुबह भरपेट खाना शुरू किया, तबसे उन्हें डायबिटीज यानि शुगर कम हो गयी, किसी का कॉलेस्टेरॉल कम हो गया, किसी के घुटनों का दर्द कम हो गया , किसी का कमर का दर्द कम हो गया, गैस बनना बंद हो गई, पेट मे जलन होना बंद हो गया ,नींद अच्छी आने लगी। और यह बात बागभट्ट जी ने 3500 साल पहले कही कि सुबह का किया हुआ भोजन सबसे अच्छा है।
सुबह सूरज निकलने से ढाई घंटे तक यानि 9.30 बजे तक, ज्यादा से ज्यादा 10 बजे तक आपका भरपेट भोजन हो जाना चाहिए। और ये भोजन तभी होगा जब आप नाश्ता बंद करेंगे । यह नाश्ता का प्रचलन हिंदुस्तानी नहीं है , यह अंग्रेजो की देन है , और रात्री का भोजन सूर्य अस्त होने से आधा घंटा पहले कर लें। तभी बीमारियों से बचेंगे। सुबह सूर्य निकलने से ढाई घंटे तक हमारी जठराग्नि बहुत तीव्र होती है। हमारी जठराग्नि का सम्बन्ध सूर्य से है। हमारी जठराग्नि सबसे अधिक तीव्र स्नान के बाद होती है। स्नान के बाद पित्त बढ़ता है , इसलिए सुबह स्नान करके भोजन कर लें। तथा एक भोजन से दूसरे भोजन के बीच 4 से 6 घंटे का अंतराल रखें बीच में कुछ न खाएं, और दिन डूबने के बाद बिल्कुल न खायें। चूंकि यह पक्षियों और जंगली जानवरों की दिनचर्या में सम्मिलित है, अत: वे अमूमन बीमार नहीं होते। आयुर्वेद के अनुसार, शाम का खाना सूर्य छिपने से पहले हो तो कभी बीमार नहीं होवेगे।
विजय कुमार जैन राघौगढ़
नोट:-लेखक स्थायी अधिमान्य स्वतंत्र पत्रकार एवं भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक है।




